अपराधी कौन?

अभी कुछ माह पूर्व मुझे मेरी एक विदेश यात्रा के दौरान मुझे एक बुजुर्ग महिला, जो के मेरी सहयात्री थीं,  से वार्तालाप का संयोग प्राप्त हुआ। महज औपचारिकताओं से आरंभ होने वाला यह वार्तालाप उनकी  सामाजिक गतिविधियों तथा योगदानों से  होता हुआ कब उनके जीवनकाल की विषम  परिस्थितियों तक पहुँच गया, पता ही नहीं चला। वह एक अत्यंत ही प्रखर, मृदुभाषी एवं सफल महिला थीं। वे  अपनी जीवन यात्रा में विषद अध्ययन कर उच्च शिक्षा के शिखर पर पहुंची थीं। उनकी सफलता के पीछे छुपे उनके संघर्ष के विषय में जानकारी प्राप्त करने हेतु मेरा मन उत्सुक था, कि इस प्रेरणा को में उन अनेक युवक युवतियों तक पहुंचा  सकूँ जो जीवन में किसी  अर्थपूर्ण ध्येय को  हासिल करना चाहते है। परंतु उनकी कहानी सुनने के बाद मैंने जाना कि उनके जीवन संघर्ष के आयाम मेरी कल्पना से परे थे। उन्होंने तमाम उपेक्षाओं से  हार ना मानते हुए अपनी मंजिल को पाने की अपनी जिजीविषा को किसी भी प्रकार से क्षीण ना होने दिया था। उनके बचपन की एवं उनके परिवार के  उनके प्रति व्यवहार को सुनने के पश्चात, मेरा मन खिन्न हो उठा।। शिक्षित परिवारों में भी बेटे और बेटी के भेदभाव की संकीर्ण मानसिकता शायद न बदल पाई थी। यह कविता उनकी व्यथा को व्यक्त करने का एक प्रयास है, एक माध्यम है।